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बुधवार, फ़रवरी 28, 2018

श्रीदेवी...अनकही कहानी जरूर पढ़ें

क्यो श्रीदेवी सबसे अलग थी

हालांकि मैं बॉलीवुड के बारे में ज्यादा लिखना पसन्द नही करता और सन्नी लियोन जैसी बदचलन के हीरोइन बनने के बाद तो कभी नही
क्योंकि अब बॉलीवुड अपनी अहमियत खो चुका है वो इज्जत खो चुका है बॉलीवुड जिसके लिए कभी भारतीय दर्शक फिल्मे देखने के लिए हदे पार कर लिया करते थे वो दौर जब अपने पसन्द के अभिनेता अभिनेत्रियों की फिल्में सिल्वर जुबली गोल्डन जुबली मनाती थी तब उनके फैंस अपने इलाके में  अपनी गलियों में  अपनी कॉलोनी में मिठाइयां बांट कर खुशी मनाया करते थे
वो दौर जब दूरदर्शन पर हर शुक्रवार अपने पसंदीदा अभिनेता अभिनेत्री की फ़िल्म के प्रदर्शन के लिए लोग भगवान से पार्थनाये किया करते थे ये 80 ओर 90 का दौर था आज सब कुछ बदल चुका है आजकल तो फ़िल्म प्रदर्शन से पहले ही अपनी लागत वसूल लेती है आज कोई फ़िल्म मल्टीप्लेक्स में 7 दिन हाउस फूल चल जाये तो ये उसके लिए किसी सिल्वर जुबली से कम नही है सिंगल स्क्रीन थियेटर के दौर में "कहो ना प्यार है" अंतिम फ़िल्म थी जिसने अपने 100दिन पूरे किए थे और गोल्डन जुबली मनाई थी

मौत ऐसी की बॉलीवुड भी हेरान

24 फरवरी 2018 रात न्यूज़ देखते वक्त श्रीदेवी की रहस्यमयी मौत की खबर मिली
रहस्यमयी इसलिये की सबकुछ होते हुए भी कुछ तो कमी रही होगी जो श्रीदेवी जैसी अदाकारा को इस तरह की मौत नसीब हुई और छोड़ गई अपने पीछे भरा पूरा परिवार जिसमे दो बेटियां ओर प्रतिभावान प्रोड्यूसर जैसे पति बोनी कपूर.....
श्रीदेवी...
जब होश संभाला थोड़े बहुत गीत होटो पर अक्सर आते थे उनमें से एक था " मोरनी बाग़ा में बोली आधी रात मा" 90 की शुरुवात में अक्सर रेडीयो पर ये गीत बजता था  जब 1992 में शिक्षा प्रारम्भ के लिये अजमेर गया तब टीवी देखते अखबार पढ़ते बॉलीवुड के बारे में भी काफी कुछ जानने को मिला उस दौर की सुपरहिट फिल्में चांदनी लम्हे ओर चालबाज मेने दूरदर्शन की महरबानी से ही पहली बार देखी थी तब ही टीवी पर पहली बार श्रीदेवी को भी देखा ये वो दौर था जहाँ अभिनेता सर्वेसर्वा हुआ करता था और फ़िल्म उसके इर्दगिर्द घुमा करती थी ऐसे दौर में चांदनी ओर चालबाज जैसी महिला प्रधान फिल्मे सुपरहिट होना और मिस्टर इंडिया का ब्लॉकबस्टर हिट होना श्रीदेवी की अहमियत दर्शा रहा था उस दौर में किसी हिरोइन का 1 करोड़ रु मेहनताना लेना पूरे बॉलीवुड ने श्रीदेवी की हेसियत दर्शाने वाला मंजर था
मुझे आज भी याद है जब मैने श्रीदेवी को पहली बार थियेटर में बड़े पर्दे पर फ़िल्म रूप की रानी चोरो का राजा फ़िल्म में देखा मुझे आज भी याद है वो अजमेर का श्री सिनेमा था जो उस दौर में श्रीदेवी की फिल्में लगाने के लिये प्रसिद्ध था आज में भी अजमेर में नही ओर अब वो श्री सिनेमा भी नही.....
उसकी जगह बड़े बड़े मल्टीप्लेक्स ने ले ली है
श्रीदेवी की शादी से पहले अंतिम फ़िल्म 1997 में प्रदर्शित जुदाई फ़िल्म ये  मेरी  अनिल कपूर श्रीदेवी अभिनीत सबसे पसंदीदा फ़िल्म है और सच कहूँ तो इसके बाद मेने कभी श्रीदेवी को बड़े पर्दे पर नही देखा असल मे कहु तो इसके बाद कभी समय ही नही मिला इतना कि फ़िल्म को थियेटर में जाकर देखा जाए
श्रीदेवी अय्यपन बाल कलाकार के रूप में तमिल फिल्मों से शुरुवात करने वाली जिसने बॉलीवुड में सैकड़ों हिट फिल्में दी और उन्हें पहली सुपरस्टार हिरोइन का दर्जा मिला क्योंकि 1985 मिस्टर इंडिया से लेकर 1992 लम्हे फ़िल्म तक उन्होंने 1 करोड़ प्रति फ़िल्म का मेहनताना लिया श्रीदेवी ऐसी पहली बॉलीवुड हीरोइन थी जिन्होंने अपने लिए पर्सनल वेनिटी वेन रखने की शुरुवात की ताकि शूटिंग के वक़्त खाली समय मे वो बोरियत महसूस न करे
आज श्रीदेवी पंचतत्व में विलीन हुई और बॉलीवुड का भी एक अद्ध्याय खत्म हुआ आज जब मीडिया मार्फ़त श्रीदेवी का पार्थिव शरीर देखा तो पाया कि 54 वर्ष की उम्र सांस छोड़ें हुए 5 दिन बीत जाने के बाद भी उनके चेहरे पर जो तेज था वो आजकल के जीवित लोगो मे भी नही होता
शायद ये जिंदादिली की पहचान थी
 

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