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शुक्रवार, जून 28, 2019

क्यो लगाई स्टेडियम मे आग?? क्या फिक्स था 1996 का सेमीफ़ाइनल जब शर्मिंदा हुआ क्रिकेट




भारतीय टीम का 1996 विश्व कप मे इतना अच्छा प्रदर्शन था की दावेदारी मे प्रथम स्थान पर चल रही थी

 ओर साथ ही चल रहा था 22 वर्षीय युवा सनसनी सचिन तेंडुलकर का बल्ला ओर एक के बाद एक मैच मे सचिन का अच्छा प्रदर्शन भारत की दावेदारी को ओर मझबूत बना रहा था बेंगलोर मे हुए क्वाटर फ़ाइनल मे भारतीय टीम पाकिस्तान को शानदार तरीके से पटखनी देते हुए सेमी फ़ाइनल मे पहुंची थी लीग मेचों मे भारतीय टीम 5 मे से सिर्फ 2 मैच हारी थी एक औस्ट्रेलिया से ओर दूसरा उस श्रीलंका से जिससे अब सेमी फ़ाइनल मे मुक़ाबला होना था श्रीलंका के खिलाफ लीग मैच मे दिल्ली के फिरोज़शाह कोटला मे सचिन तेंदुलकर के लाजवाब शतक के बावजूद भारतीय टीम हार चुकी थी सो लोगो के दिमाग मे कोटला का डर तो वैसे ही सताये जा रहा था ओर अगला ही मैच सेमी फ़ाइनल के रूप मे फिर से लंका के सामने ही खेलना था 1996 मे विश्व कप शुरू होने से पहले फिसड्डी टीम मानी जाने वाली लंका धमाके पर धमाका किए जा रही थी जयसूर्या ओर कालूविथरना की ओपनिंग साझेदारी ओर मुरलीधरन की अगुआई मे स्पिन जोड़ी जिसमे धर्मसेना डिसिल्वा जयसूर्या भी शामिल थे उस विश्व कप मे लंका की तरफ से कुल 7 बल्लेबाज बाए (LEFTY) हाथ से बेटिंग करते थे जो किसी भी विश्व कप टीम का एक अनोखा रिकॉर्ड था इन सब के बावजूद सट्टेबाजों की मार्केट से लेकर आम दर्शको तक की नजर मे विजेता के लिए फेवरिट थी तो सिर्फ 2 टीमे एक औस्ट्रेलिया ओर दूसरी भारत




13 मार्च 1996 को कोलकाता मे पहला सेमी फ़ाइनल खेले जाने से ठीक एक दिन पहले ही ईडेन गार्डन के पिच क्यूरेटर ने भारतीय कप्तान मोहहमद अजहरुदीन को स्पष्ट निर्देश दे दिये थे की दूसरी पारी मे पिच इतनी धीमी हो जाएगी की 10 ओवर बाद वहा खड़े रहना भी मुश्किल हो जाएगा लक्ष्य का पीछा करना तो बहुत दूर की बात होगी

ओर फिर आया 13 मार्च का वो दिन जब तपती दुपहरी मे रानातूंगा ओर अज़हर टॉस के लिए पहुंचे ओर लाखो भारतीयो की दुआओ से अज़हर ने टॉस भी जीत लिया लेकिन फेसला लिया फील्डिग का ओर स्टेडियम मे मोजूद 25 हजार दर्शको के अलावा टीवी सेट पर बैठे हमारे जैसे लाखो भारतीय खफा भी थे ओर निराश भी की क्योकी अज़हर ने इतनी सब जानकारी होने के बावजूद टॉस जीतने के बाद भी लंका को पहले बेटिंग परोस दी थी




कुछ वक्त के लिए नाराज दर्शको के चेहरे पर यकायक खुशी तब छाई जब मैच शुरू होते ही जवागल श्रीनाथ ने पहले ओवर मे ही कालूविथरना को 00 पर आउट कर लंका को वो झटका दिया जो पूरे विश्व कप मे कोई न दे पाया था ठीक उसके बाद विश्व कप के स्टार जयसूर्या को भी श्रीनाथ ने चलता किया ओर उसके बाद गुणरतने को भी निपटा दिया 35 पर लंका 3 विकेट खो चुका था ओर ये इस विश्व कप मे लंका के साथ पहली बार हुआ था अचानक ही लगा की अजहरुदीन ने जो किया वो सोच समझ कर किया ओर बेहतर किया है लेकिन असल फिल्म तो अब शुरू होनी थी क्योकि उसके बाद डिसिल्वा रोशन महनामाँ ओर अर्जुना राणातूंगा ने भारतीय गेंदबाजो को कोई मोका नहीं दिया ओर 50 ओवर पूरे होते होते लंका 251 बना चुकी थी लेकिन भारतीय टीम आश्वस्त थी की टार्गेट इतना बड़ा भी नहीं है की टीम इंडिया को फ़ाइनल मे जाने से रोक पाये ओर ऊपर से सचिन की विश्व कप मे फार्म को देखकर पूरा देश आश्वस्त था



 जब भारतीय टीम की पारी शुरू हुई तो शुरुवात मे ही लंका ने नवजोत सिद्धू के रूप मे 8 रन पर पहला झटका दे दिया लेकिन दूसरे छोर पर सचिन का जल्वा कायम था ओर साथ मिला उनके बचपन के साथी मुंबइया मांजरेकर का ओर दोनों ने मिलकर अगले 15 ओवर मे 90 रन जोड़ दिये जो उस दौर मे बहुत तेज माने जाते थे लाखो भारतीय दर्शक आश्व्त हो चुके थे की आज सचिन जिस रूप मे खेल रहे है लंका को कल सुबह की फ्लाइट पकड़ कोलंबो जाने से कोई नहीं रोक सकता तभी आया मैच मे असल मोड जिसे आज भी फिक्सिंग का नाम दिया जाता है क्योकि 98 रन पर एक विकेट ही ग्वाया हो ओर भारत को जीत के लिए अब सिर्फ 153 ही बनाने हो ऐसी स्थिति मे किसे पता था की भारतीय टीम का वो हश्र होने वाला है जो देश दुनिया के लाखो दर्शको ने कभी सपने मे भी न सोचा होगा???
क्योकि अगला ओवर लेकर आए स्पिनर जयसूर्या ओर सचिन उनकी पहली ही गेंद पर स्टम्प आउट हो गए निर्णय तीसरे एम्पायर के पास गया जिसमे साफ साफ दर्शा रहा था की सचिन का बेट क्रीज़ मे पहुँच गया था लेकिन उसके बावजूद भी लाल बत्ती जली ओर सचिन आउट (क्योकि मैच जो फिक्स था ) टीवी के सामने हम सभी ये देख स्तब्ध भी थे ओर हथ्प्र्भ भी क्योकी सचिन का बेट क्रीज़ के लगभग 2 से तीन इंच तक अंदर था ओर सचिन खुद इस फेसले से नाराज थे ओर उसके बाद शुरू हुआ फिक्सिंग का नंगा नाच भारत एक बाद एक ऐसे विकेट खोते जा रहा था जैसे नोसिख्या टीम हो ओर पहली बार बल्ला हाथ मे लिया हो या कोई केचिंग प्रेक्टिस चल रही हो क्योकि ये वही भारतीय टीम के खिलाड़ी थे जिन्होने पिछले मैच क्वाटर फ़ाइनल मे पाकिस्तान के सबसे बढ़िया बॉलिंग अटेक को साबुन रगड़ रगड़ कर धोया था क्योकि जाने माने तेज बॉलर वकार यूनिस के 2 ओवर मे कोई 44 रन ठोक देवे ऐसा लगभग नामुमकिन था लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने वो कर दिखाया था लेकिन इसके उलट ईडेन गार्डन मे अलग ही टीम खेल रही थी सही कहूँ तो खेल ही नही रही थी बस बल्लेबाज़ क्रीज़ पर नाच रहे थे भारतीय खिलाड़ियो का नोसिख्यापन देख दर्शक ही नही बल्कि श्रीलंकन खिलाड़ी भी हैरान थे बल्कि वे तो हंस रहे थे क्योकि 98 रन पर एक विकेट गँवाने वाली टीम इंडिया 120 पर 8 विकेट खो चुकी थी यानि मात्र 22 रन बनाते बनाते 7 विकेट खो चुकी थी ओर अज़हर ओर जडेजा का आउट तो आज भी भुलाए नही भूलता क्योकि अज़हर का कैच देना ओर जाडेजा का बोल्ड होना आज भी यू ट्यूब पर वीडियो देख लीजिये संदेह की स्थिति ही पैदा करता है ओर 120 तक आते आते स्टेडियम मे वो हुआ जिसके लिए बीसीसीआई समेत पूरा देश शर्मिंदा हो गया ओर विल्स विश्व कप 1996 मे एक न्या विवाद उत्पन्न हो चुका था क्योकि कोलकाता के दर्शको से भारत टीम का ये जान बूझकर किया गया घटिया प्रदर्शन देखा नहीं गया ओर स्टेडियम मे आग लगा दी ग्राउंड के चारो तरफ आग ही आग थी ओर मैदान मे खिलाड़ी
श्रीलंकन टीम समझ चुकी थी की अब दर्शक आगे का मैच तो नही होने देंगे उधर भारतीय बल्लेबाज विनोद कांबली की आंखो मे आँसू क्योकि ऐसी स्थिति मे भी उन्हे लग रहा था की वे ओर अनिल कुंबले ये मैच भारत को जित्वा देंगे जबकि कुंबले ने तो एक गेंद भी नही खेली थी जबकि कांबली 10 रन बना कर नोट आउट थे ये क्रिकेट जगत के लिए काला दिन था क्योकि जेंटेलमेन खेल क्रिकेट मे पहली बार ऐसा हुआ था की दर्शको के अवरोध से मैच रुका हो ओर मैच रेफरी ने नेट रन रेट के आधार पर श्रीलंका को विजयी घोषित कर दिया ओर पहली बार फ़ाइनल मे पहुंची लंका टीम ने 1996 फ़ाइनल भी जीता ओर विश्व कप अपने नाम किया लेकिन उस दिन भारतीय टीम की बल्लेबाजी ओर 2000 मे अहजर के फिक्सिंग मे लिप्त होने पर इस मैच के बारे ,मे पूछताछ भी हुई थी जो सिर्फ फ़ाइलो मे लिखी हुई है असलियत तो आज तक सामने नहीं आई है


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