एक युग का अंत "स्टाइलिश युवराज" - khabar buzz

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मंगलवार, जून 11, 2019

एक युग का अंत "स्टाइलिश युवराज"



मुझे आज भी याद है 3 अक्टूबर सन 2000 का साल........

स्कुल में ठीक 12:30 पर छुट्टी हुई  बाहर निकलते वक्त दोस्तो में एक ही चर्चा थी आज ICC नॉकआउट ट्रॉफी में भारत का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से है आज अगर भारत जीत जाए तो सेमीफाइनल में आसानी से पहुंच जाएगा ठीक 1:30 बजे घर पहुंचे तब मैच शुरू हो चुका था क्योकि नैरोबी में मैच 10 बजे शुरू होता था जब भारत मे 12 बज चुके होते थे

जब टीवी के सामने पहुंचे तो पाया कि भारत के 2 विकेट जा चुके है और कोई युवराज सिंह नाम का नया लड़का खेल रहा है जब हम  एक बार देखने बैठे तो बस देखते रह गए स्टीव वॉ के ऊपर से पॉइंट पर जो शॉट मारा सबको यकीन हो गया कि ये लम्बी रेस का घोड़ा है बहुत आगे जाएगा.....

भारत के विस्फोटक बल्लेबाज ओर ऑलराउंडर विश्व कप विजेता टीम के हीरो युवराज सिंह ने कल सन्यास ले लिया मिलेनियम दौर के लोग जिन्होंने युवराज को करीब से खेलते हुए  देखा था उनके लिए ये क्षण भावुकता भरा था क्योकि हमने वो भारतीय क्रिकेट का वो दौर भी देखा था जब एक बाद एक नामचीन क्रिकेटर मैच फिक्सिंग के आरोपो में फंस कर आजीवन प्रतिबंध झेल रहे थे भारत की नई नवेली टीम 24 वर्षीय सौरव गांगुली की अगुवाई में पहली बार कोई बड़ी प्रतियोगिता खेलने नैरोबी पहुंची थी ये वो दौर था जब भारतीय क्रिकेट बदलाव के दौर से गुजर रहा था इसी बदलाव की बहार से निकले थे मोहहमद कैफ जाहिर खान और युवराज सिंह

गांगुली अग्रेसिव कप्तानों में गिने जाते थे अपने फैसले पर लड़ने के लिए चर्चित थे और वेटरन 36 वर्षीय रोबिन सिह की जगह 20 वर्षीय युवराज को टीम में लेने के लिए गांगुली चयन समिति की बैठक में भी लड़ लिए थे

मुझे आज भी याद है एक क्रिकेट मैगजीन के इंटरव्यू में युवराज में कहा था कि हां में दादा की मेहरबानी से टीम में हु वरना हजारों प्रतिभाएं आती है जाती है टीम इंडिया की जर्सी पहनने का मौका किस्मत वालो को ही मिलता है

जब बात किस्मत की ही चली है तो बताते चले कि युवराज किस्मत के धनी थे तभी उनके घर के पीछे प्रेक्टिस के लिए बाकायदा उनके पिताजी ने फ्लड लाइट युक्त नेट लगवाए थे ताकि युवराज प्रेक्टिस कर सके युवराज़ के पिता योगराज सिह ओर कपिल देव ने अपना कैरियर साथ मे शुरू किया था दोनों चंडीगढ़ से निकले और इंडियन टीम तक पहुंचे लेकिन योगराज सिह अपनी लापरवाही जिद ओर अड़ियल रवैये के कारण सिर्फ 1 टेस्ट खेल सके उसके बाद कभी वापस टीम में नही आये योगराज सिह का यही अड़ियल रवैया था जिसके कारण युवराज सिंह ने रात दिन मेहनत की ओर भारत के लिए 300 से ज्यादा वनडे खेले

युवराज की मॉ शबनम सिह ने कहा था कि अगर युवराज क्रिकेटर नही होता तो वो आज स्नूकर का भारत का नम्बर 1 खिलाडी होता लेकिन ये जोगराज सिह की  अड़ियल जिद ही थी जिसने युवराज को एक पल के लिए भी क्रिकेट से इतर सोचने का भी मौका नही दिया.....

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी पहली पारी में ताबड़तोड़ 84 रन बना मेन् ऑफ दी मैच बनने वाले युवराज सिंह कुछ ही घण्टो में देश के नए हीरो बन गए थे चारो तरफ युवराज के पोस्टर विज्ञापनो में बड़ी बड़ी कम्पनियों के साथ अनुबंध ऐसे में जरूरी था कि रन बनाना न भूले पर जब आगे वे इस कामयाबी को दोहरा नही सके तो किसी ने कहा कि ये तो वन  टाइम वंडर था सिर्फ एक मैच की कामयाबी ने युवराज दिमाग खराब कर दिया है हांलकि तब ऐसा भी दौर आया जब उन्होंने 9 मैचों में मात्र 100 ही बनाए और उन्हें टीम इंडिया से बाहर निकलते देर नही लगी
बहुत कम क्रिकेटर ही ऐसे है जो एक बार भारत की टीम दे निकल गए ओर फिर उन्हें  वापस  मौका मिला हो युवराज भाग्यशाली थे ऐसे में उन्हें कप्तान सौरव गांगुली का पूरा साथ मिला और वो गांगुली की जिद ही थी जो युवराज को ड्राप होने के 4 महीने बाद ही वापस टीम में जगह मिली और आते ही युवराज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दोनों मैचों में 80 एव 75 नाबाद की शानदार पारियां खेली इसमे दूसरे मैच में 50 गेंदो पर 75 वाली पारी तो इतनी शानदार थी कि दिनेश मोंगिया के 159 रन भी उस दिन फिके पड़ गए

ओर उसके बाद का दौर नेटवेस्ट ट्रॉफ़ी जिसने शायद दो जिंदगियां बदल दी युवराज ओर मोहम्मद कैफ भारत को दो नए सितारे मिल गए थे क्योकि जब लोग सचिन के आउट होते ही टीवी बन्द कर दिया करते थे उस दौर में 145 पर 5 विकेट गिर जाने के बाद भारत द्वारा 325 का लक्ष्य पार कर लेना....??? आज भी सोचता हूं तो पाता हूं अदभुत पारी  ऐसी पारियां सदियो में कभी कभार देखने को मिलती है

ओर उसके बाद आया एक ओर न्याल युग T20 क्रिकेट का युग सन 1985 में केरी पैकर ने जो रंगीन ओर फ़ास्ट क्रिकेट का सपना देखा था वो 2007 में पहले T20 विश्व कप के साथ पूर्ण होने जा रहा था और इस पहले टी20 विश्व कप में युवराज का तड़का कुछ ऐसा लगा जैसे पकी हुई दाल में लाल मिर्च कस तड़का...


पहले इंग्लैड के खिलाफ 6 गेंदो पर 6 छक्कों ने फ्लिंटॉफ को मिड विकेट पर फील्डिंग करते वक्त सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि अब रिटायर्ड होने का समय आ गया

फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वो पारी जिसके कारण हेडन जैसे ने कह दिया कि अब नया दौर इंडियन प्लेयर्स का आने वाला है

वर्ष 2007 से 2011 का दौर युवराज सिंह के लिए सुनहरा दौर रहा 2011 में विश्व कप में युवराज़ के बेट एव बॉल के साथ  प्रदर्शन ने कभी ये जाहिर नही होने दिया कि वो अंदर ही अंदर एक ओर लड़ाई लड़ रहा है अपने आप से लड़ाई जिंदगी मौत की लड़ाई....

लेकिन युवराज किस्मत के धनी ओर  कभी हार न मानने वाले इस बार भी बड़ी लड़ाई जीत गए

भारत ने जो दो विश्व कप जीते उनमे दो क्रिकेटरों का योगदान आज भी अहम मानता हूं पहले गौतम गम्भीर दूसरे युवराज सिह इन दोनों खिलाड़ियो ने जब जब जरूरत पड़ी टीम को मुश्किल परिस्थितियों से उबारा ओर जीत के दरवाजे तक ले गए युवराज सिंह पिछले दो तीन सालों से अपने खेल पर निरन्तरता नही रख पाए जिसका नतीजा टीम से अंदर बाहर होते रहे अंनत पिछले साल आईपीएल ऑक्शन में कोई टीम तक उन्हें खरीदने को तैयार नही थे ऐसे में पुराने मित्र और गुरु जी सचिन पाजी ने युवराज को मुम्बई इंडियन के पाले में बुला लिया लेकिन इस बार भी युवराज का बल्ला उड़ तरह से नही बोला जैसा लोग पिछले कई सालों से देखते आ रहे थे नतीजतन युवराज सिंह ने खुद आत्ममंथन किया और पाया कि इस क्रिकेट ने हमे बहुत दिया जिंदगी के 19 कीमती साल बिताए इस 22 गज की पिच के बीच मे अब समय आ गया है अलविदा लेने का

ओर एक दिन 10 जून 2019 जब अचानक से युवराज सिंह एक प्रेस कांफ्रेंस करते हुए नम हुई आंखों एव भरे हुए गले से कहते है

"अब बहुत हो गया क्रिकेट'








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