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सोमवार, जून 24, 2019

जसोल हादसा जिम्मेदार कोन ????


कल बाड़मेर जिले के जसोल धाम मे घटी अकस्मात लेकिन अत्यंत दुखद घटना ने 15 लोगो की जान ले ली जबकि 50 से ज्यादा घायल है जिनका उपचार जारी है सबसे पहले तो इस पोस्ट के मार्फत उन सभी श्रद्धालुओ को अश्रुपूरित श्रद्धांजली जो श्रीराम कथा सुनने आए थे लेकिन शकुशल अपने घर नहीं पहुँच पाये ओर उम्मीद करता हूँ की जो घायल हुए है तुरंत उपचार बाद अपने घर पहुंचे.....

अब आते है असल मुद्दे पर
आखिर ऐसे हादसो की ज़िम्मेदारी कोण लेगा???
 सरकार???
 प्रशासन???
  ट्रस्ट ???
या आयोजनकर्ता ???
बाकी आप हर एक केस मे सिर्फ ऊपर वाले (भगवान) को दोषी तो नही ठहरा सकते



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कुछ सालो पहले फिल्म आई थी ओह माय गोड जिसमे एक बीमा कंपनी को एक्ट ऑफ गॉड का तर्क देते हुए हम सब ने सुना था जिसमे कहा गया था की प्रकर्तिक हादसो की ज़िम्मेदारी सिर्फ भगवान की होती है ओर किसी को दोष नही दे सकते
कल का हादसा मान लेते है 10% तक प्राकर्तीक था लेकिन बाकी 90% तक सिर्फ लापरवाही ओर नासमझी के कारण ही घटित हुआ क्योकि आँधी बरसात तूफान तो हर जगह आते है लेकिन ऐसे ही एक साथ किसी की 15 जाने नही जाती
कुछ बुद्धिमानों को आज सुबह कहते सुना की ऐसे कथा आयोजनो की जरूरत ही कहा है ???
हो सकता है वे जनाब नास्तिक हो लेकिन वे भूल जाते है की हम सांस्कृतिक देश भारत मे रहते है जहां विवाह से लेकर म्रत्यु तक ब्च्चे के जन्म से लेकर नामकरण तक को भी आयोजन के रूप मे मनाया जाता है तो क्या ऐसे हादसो के कारण हम भारत वासी हमारी पारंपरिक संस्कृति को भूल कोर्ट मेरीज का चलन शुरू कर दे ????
बेहतर होगा की नुक्स निकालने के बजाए उचित कारणो पर बात की जाये राज्य सरकार ने मृतको को 5 लाख की घोषणा कर संवेदना प्रकट करते हुए पल्ला झाड लिया है ठीक जैसे मेहराणगढ़ हादसे के वक्त 140 से ज्यादा लोगो मृत्यु होने के बाद घोषणा करते हुए जांच के आदेश देकर पल्ला झाड दिया था जिस जांच की रिपोर्ट आज 10 साल बाद भी पूरी नही हुई है तो क्या स्थानीय प्रशासन दोषी है जिन्होंने इस मोसम मे राम कथा की परमिशन दी ????
या फिर ट्रस्ट जिसके आदेशानुसार जगह पंडाल ओर टेंट की व्यवस्था थी क्योकि हादसे की असल शुरुवात ही डोम गिरने से बताई जा रही है जबकि कुछ लोगो का तो ये तक कहना है की कथा वाचक मुरलीधर महाराज अगर आनन फानन मे “टेंट उड़ रहा है सभी बाहर निकाल जाइए” का आदेश न देते तो शायद इतनी भगदड़ न मचती
तो क्या इस हादसे मे रत्ती भर भी सही कथावाचक भी दोषी करार दिये जाएगे????
इन सब का खुलासा तो तभी हो पाएगा जब जांच रिपोर्ट सामने आएगी लेकिन फिर से वही सवाल की क्या जांच निष्पक्ष होगी???  क्या जांच सही समय पर आ जाएगी??
क्योकि मेहराणगढ़ हादसे की रिपोर्ट भी आजतक दोषियो को सजा नही दे पाई है ओर ज्यादा दूर न जाते हुए सूरत बिल्डिंग हादसे पर भी नजर दोड़ाए तो सिवाए खानापूर्ति के अभी तक कोई ठोस कारवाही नहीं हुई है लेकिन फ्रांस से ऐसी क्रेन जरूर मँगवा ली गयी है जो 55 माले की बिल्डिंग मे भी आग बुझाने की क्षमता रखती है लेकिन इसका भी श्रेय सरकार की बजाए सूरत के उन व्यापारी उधमियों को दिया जाना चाइए जिनकी तत्परता ओर मदद के कारण संभव हो पाया है लेकिन सबसे बड़ा प्र्शन आज भी कायम है जिसका जवाब आज तक नही मिला है
की
आखिर हम किसी हादसे बाद ही सचेत क्यो होते है ????



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