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रविवार, जून 30, 2019

road accident in india भारत मे बढ़ते एक्सीडेंट का कारण

           

           

       भारत मे बढ़ती दुर्घटनाए आखिर क्यो होते है रोज   एक्सीडेंट 

India  our loving country is basically agricultural based country where 60% people live in villages yet now


जी हाँ 60%  ये आंकड़ा पिछले 10 वर्षो का है जबकि हम आजादी के दौर की बात करे तो देश की 80% से ज्यादा जनसंख्या गांवो मे निवासित थी ओर मुख्य पेशा खेती ही हुआ करता था ये वो दौर था जब भारत की सम्पूर्ण आर्थिक स्थिति खेती से होने वाली आय पर निर्भर थी उस दौर मे परिवहन का मुख्य साधन था बेलगाड़ी ऊंटगाड़ी और घोड़े 


उस दौर मे डामर की सड़क सिर्फ शहरो को एक दूसरे से जोड़ने के लिए ही हुआ करती थी जबकि भारत का 80% हिस्सा जो ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आता था उन्होने कभी डामर भी नही देखा था ओर शहरो मे जो सड़के बनी हुई थी वहाँ सिर्फ महंगी विदेशी कारे चला करती थी जिसे खरीदने के लिए आपको अमीर होना जरूरी होता था लेकिन उस दौर मे आपको पैदाइशी अमीर होना पड़ता था क्योकि मेहनत कर के आप ज़िंदगी भर सिर्फ दाल रोटी ही खा सकते थे या ज्यादा से ज्यादा बेलगाड़ी या ऊंटगाड़ी खरीदने का सपना देख सकते थे गांवो मे जिसके पास घोडा होता वो गाँव का अमीर एव साधन सम्पन्न व्यक्ति गिना जाता था क्योकि हर किसी के पास इतनी जमीने भी न थी की वहाँ सिर्फ घोड़े को च्रराणे मात्र के लिए चारा उगाया जाएँ  उस दौर मे विदेशो से आयातित पेट्रोल कारे बहुत कम या यूं कहे तो नाम मात्र की संख्या मे हुआ करती थी मेरे दादा जी बताते थे की आजादी से पहले हमारे गाँव से 30 km दूर कस्बे  सांचोर मे जोधपुर के तत्कालीन महाराजा हनुवंत सिंह अपनी रोल्स रॉयज कार लेकर आए तो पूरे क्षेत्र की जनता सांचोर पहुँच रही थी लेकिन राजा जी को देखने नहीं बल्कि उनकी कार को देखने ओर जब राजा वापस जोधपुर की ओर चल दिये तो काफी डीनो तक लोगो ने कार के पहियो के निशान देख देख आत्मसंतुष्ठी  प्राप्त की.  

एक वो भी दौर था ओर एक आज का भी दौर है जहां सड़कों पर दौड़ती सरपट कारे दिन मे सेकड़ों लोगो की जान ले लेती है औटोमेटिक पावर स्टेरिंग ओर लुब्रिकेट लेदर ब्रेक वाली नई आधुनिक तकनीकी कारे आजकल लाख से 5 लाख रु देकर हर कोई खरीद लेता है जो आसान किशते भरने की स्थिति मे हो 

देश मे जिस गति से वाहन खरीदे जाते है उसी गति से दुर्घटनाए भी बढ़ती जा रही है जबकि वाहन बिक्री से ज्यादा दुर्घटना मे होने वाली मौते है तो क्या सिर्फ वाहनो की बढ़ती संख्या ही दुर्घटना का मुख्य कारण है ????


जी नहीं....... 

भारत से ज्यादा तो विकसित देशो मे आधुनिक कारे सड़कों पर दौड़ती है ओर भारत की तुलना मे कही ज्यादा बिक्री होती है फिर वहाँ  दुर्घटना की दर भारत से इतनी कम क्यो?????


वर्ष 1991 से पहले भारत मे कार बाइक खरीदना हर किसी के बस मे नहीं था या यूं कहे की इतना आसान नहीं था तो बेहतर होगा क्योकि तब व्यक्ति कार लेने से पहले 10 दफा आगे पीछे सोचा करता था देश मे सिर्फ सरकारी अधिक्रत्त ही बेंक थे जो वाहनो पर ऋण उपलब्ध नही करवाते थे सो कोई भी वाहन खरीदने से पहले उसकी पूरी रकम भरने की व्यवस्था करनी पड़ती थी ज्यादा दूर की बात नही है वर्ष 1989 से पहले सिर्फ उन लोगो के पास ही अपने वाहन होते थे जो अपने क्षेत्र मे प्रतिष्ठित माने जाते थे ओर छोटा मोटा व्यवसाय करने वाले या सरकारी नौकर मोटरसाइकल का उपयोग किया करते थे ओर उस दौर मे एक्सीडेंट भी उनके ही हुआ करते थे जो शराब सेवन या अन्य कोई नशा कर ड्राइविंग किया करते थे  आया 1991 का साल जो इंडिया के विकास मे टर्निंग पॉइंट ओफ इयर के नाम से जाना जाता है वितमंत्री मनमोहन सिंह की आर्थिक उदारीकरण की पॉलिसी जिसका शुरुवात मे लेफ्ट से लेकर भाजपा तक ने विरोध किया था लागू की गयी विदेशी कंपनियो को भारत मे ऊद्धोग लगाने की छूट मिल गयी जिससे प्राइवेट सेक्टर मे अचानक से रोजगार भर्ती मे जब्र्द्स्त उछाल आया जो सरकारी नौकर नहीं थे अथवा जिनके पास अपने खेत नहीं थे उन सब क्ला रुख प्राइवेट सेक्टर मे जॉब की तरफ हो गया ओर आए विदेशी बेंक जिसने घर बनाने से लेकर बाइक खरीदने पर भी लोन उपलब्ध करवाने की स्कीम  शुरू कर दी ये 90's का दौर था देश बदल रहा था अब आम व्यक्ति भी अपना घर ओर अपनी गाड़ी का सपना देख रहा था धड़ाधड़ गाड़ियो की बिक्री कार कंपनियो की चांदी किए जा रही थी प्राप्त आंकड़ो के अनुसार वर्ष 2002 से 2012 तक देश मे सबसे ज्यादा कारे खरीदी गयी जिसमे 85% से ज्यादा डाउन पेमेंट भर बैंक के लोन मार्फत खरीदी गयी थी देश मे सब कुछ तेज गति से बदल रहा था सिवाए सड़कों मे सुधार के 

क्योकि जिस गति  से वाहनो की बिक्री बढ़ती जा रही थी हाइवे निर्माण उस गति से नहीं हो पाये माना बड़े शहरो मे कुछ सुधार हुआ होगा ओर ज्यादा से ज्यादा 4 लेंन को 6 लेंन कर दिया होगा फिर भी देश के 70% हिस्से मे आज भी वही खस्ताहाल है जो आज से 10/15 वर्ष पहले था ज्यादा बेहतर समझाने के लिए एक छोटा सा उदाहरण दे देता हूँ  जेसे एक कस्बे को गाँव से जोड़ने के लिए वर्ष 1990 मे डामर सड़क बनी थी जिसकी चौड़ाई 10 फिट थी जो 1990 के अनुसार बेहतर थी क्योकि तब उस गाँव मे मात्र 1 कार ओर 5 मोटरसाइकल वाले ही थे लेकीन आज उसी गाँव मे 40 से 50% लोगो के पास अपनी खुद की कारे है (अधिकतर बेंक की मेहरबानी से ही होंगी) ओर 90% लोगो के पास खुद की मोटरसाइकल है लेकीन 1990 मे बने रोड की छोड़ाई सिर्फ 2 फिट ही बढ़ पाई है अर्थात वाहनो मे तो व्रद्धि हुई लेकिन सड़कों का पुननिर्माण उस स्तर पर नहीं हो पा रहा जिसकी जरूरत है ओर आज की ओटोमेटिक कारे ऐसी सड़कों पर तेज गति से दौड़ती हुई किसी की भी जान ले लेती है ओर म्रर्त व्यक्ति अगर युवा है तो सबसे पहले यही अफवाह फेलाई जाती है की वो फ्ला फला तो नशे मे था जिस कारण एक्सीडेंट हुआ जबकि ऐसा कुछ नही है हर वाहन चलाने वाला नशेबाज नहीं होता पिछले 2 महीनो मे बढ़ते एक्सिडेंट मे 3 केस ऐसे थे जो मेरे मित्र थे या परिचित ओर उन तीनों एक्सीडेंट मे किसी ने नशा नही किया था जबकि 2 तो दिन मे हुए ओर कारण था सड़कों पर बढ़ती वाहनो की संख्या ओर छोटी पड़ती  टूटी फूटी सड़के  




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