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शुक्रवार, जुलाई 05, 2019

Sonia gandhi and Rajeev gandhi love story


Sonia gandhi and Rajeev gandhi love story


Sonia Maino & Rajeev Gandhi (love story)


31st Oct. 1984 दरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री का बंगला समय तकरीबन सुबह के 10 बजे होंगे प्रधानमंत्री इंद्रा गांधी की हत्या हो चुकी थी अपनी म्रतप्राय सास को बाहों मे समेटे एक युवती रोते हुए इतालवी भाषा मे बोले जा रही थी नो नो मांद्रे मिया नो शायद ये अंतिम बार था जब इंद्रा की बहू राजीव की पत्नी सोनिया माइनो हिंदुस्तान मे इतालवी भाषा बोलते हुए रो रही थी इसके बाद सोनिया गांधी को कभी इतालवी बोलते नही देखा गया किसी ने सही ही तो कहा है सच्चा दुख मात्रभाषा मे ही झलकता है ओर उस रोज सोनिया को पता नहीं था की वे जो शब्द बोले जा रहीं है आस पास खड़े लोगो मे कोई नही समझ सकता है

Sonia Gandhi maino

इटली के उतरी पूर्व मे वेनेतो एक समय किसानो का गरीब इलाका कहा जाता था लेकिन आज वो छोटे बड़े उद्धोगों से पटा समृद्ध इलाका है इसी वेनेतो के लूसियाना मे 9 दिसंबर 1946 को सोनिया माइनो का जन्म हुआ. पिता स्टेफ़िनों ने अपनी दोनों बड़ी बेटियों का नाम आनुष्का ओर सोनिया  द्वितीय विश्वयुद्ध मे नाजियों के साथ मिलकर चलाये गए इतालवी सेना के सबसे रक्तरंजित अभियान की याद मे रखा था
युद्ध के बाद ये परिवार पच्छिम इटली के तुरिन मे जाकर बस गए 50 के दशक मे इटली का पुर्णोद्वार हो रहा था तुरिन मे बन रही फिएट कारे खरीद रहे थे लोग खुद के मकान बना रहे थे सोनिया के पिता स्ट्रेफ़िनों भी मकान बनाना चाहते थे उन्होने ओर्बासानो मे बगीचे के पास अपना साधारण सा मकान बनवा दिया.
ओर्बासानो किसानो मजदूरो की आबादी वाला शहर था सोनिया माइनो यही पाली बढ़ी ओर 30 किमी दुर सेलेसियान ननो द्वारा चलाये जा रहे नर्सरी स्कूल मे पढ़ती थी उस समय तक हर जगह पब्लिक स्कूल नहीं खुले थे  और माता पिता बच्चो को सुरक्षित माने जाने वाले केथोलिक स्कूलों मे ही पढ़ाया करते थे इटली की 90 फीसदी आबादी केथलिक है ओर माइनो परिवार भी अपवाद नहीं था सोनिया माइनो स्कूल मे एक मेहनती छात्रा थी सोनिया का सपना फ्लाइट अटेंडेंट बनने का था जिसके लिए सोनिया ने इंगलेंड जाने का मन बना लिया पहले तो उन्होने इंगलेंड के 60 के दशक मे मशहूर हुआ ट्विस्ट डांस सीखा फिर 18 की उम्र होते ही माता पिता को इस बात के लिए राजी कर दिया की वे अंग्रेजी सीखने ओर बाकी की पढ़ाई के लिए इंगलेंड जाना चाहती है थोड़े से ना नुकुर के बाद पिता स्टेफ़िनों ने सोनिया को केंब्रिज के लिए आखिरकार इजाजत दे ही दी लेकिन केंब्रिज जाने के बाद सोनिया वहाँ के प्रतिष्ठित ट्रिनिटी कॉलेज मे दाखिल नहीं हुई (जहां उनके भावी पति राजीव गांधी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे) बल्कि सोनिया ने एक घरेलू काम करना शुरू कर दिया जिससे पॉकेट मनी मिलती रहे ओर खाली समय मे एक छोटे से गुमनाम स्कूल मे अंग्रेजी पढ़ने जाया करती थी कुछ ही दिनों के भीतर स्टूडेंट्स के लिए मशहूर ग्रीक रेस्टोरेन्ट मे सोनिया की मुलाक़ात राजीव से हुई पहली मुलाक़ात के बाद ही दोनों मे दोस्ती बढ़ती चली गयी दरअसल राजीव को सोनिया से मिलवाने का श्रेय राजीव के एक ब्रिटिश दोस्त को जाता है जो जिसका घर सोनिया के किराए वाले मकान क्ले पास ही था लंबी कद काठी वाले हेंडसम राजीव भी उन दिनों पाइलेट बनने का सपना देख रहे थे और भूरे घुँघराले बालो वाली इटालियन सुंदरी फ्लाइट अटेंडेंट का. सो दोनों के विचार भी लगभग मेल खाते थे ओर जल्द ही दोनों के बीच मुलाकातों का दौर भी शुरू हुआ जिसे आजकल के लड़के डेटिंग बोला करते है केंब्रिज मे एक पब के बाहर लकड़ी की टेबिल पर दोनों की तस्वीर बाद मे बहुत विख्यात हुई जिसे सोनिया माइनो ने उस वक्त से लेकर 20 साल तक अपने पास संभाल कर रखा ओर फिर एक इतालवी पत्रकार को सोंप दी जो सोनिया राजीव पर इतालवी मे एक आर्टिकल लिख रहा था
केंब्रिज मे अंग्रेजी की पढ़ाई खतम होने के बाद सोनिया ओर्बासोना लौट आई वेनेतो की व्यवहारकुशल इस लड़की भांप लिया था की राजीव इस दोस्ती को लेकर गंभीर है सोनिया के घर पहुँचते ही ओर्बसोना स्थित उसके घर अंतर्राष्ठीय फोन काल्स ओर चिट्ठियों की भरमार हो गयी जो राजीव गांधी रोज केंब्रिज से भेजा करते थे सोनिया के पिता स्टेफ़िनों चिढ़ गए माँ पाओला परेशान हो गयी इस दौरान सोनिया तुरिन के एक ट्रेड शो सेंटर मे असिस्टेंट के रूप मे काम करने लगी थी करीब एक साल बाद 1966 मे इंद्रा गांधी के उतराधिकारी जागुआर लेकर ओर्बसोना सोनिया माइनो के घर पहुँच ही गए
माइनो परिवार ने अनमने मन से इस पढे लिखे सोम्य राजीव को अपने घर आमंत्रित किया और ये जताने की कोशिश की  कि अचानक यात्रा का कारण समझ नही आया है एक ही शाम मे उस मध्यवर्गीय इतालवी परिवार के लिविंग रूम मे सोफा, कूर्सिया, खूबसूरत काँच वाली अलमारी, ओर टीवी सेट दिखाई दिया राजीव ने खड़े होकर सोनिया के पिता स्टेफ़िनों से मुखातिब होकर कहा “ मे इटली घूमने नहीं आया हूँ मेरा इरादा पक्का है ओर मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूँ” माइनो परिवार अचंभित था सो राजीव को भी हाँ या नही मे कोई ठोस जवाब नही मिला जिसकी वे प्रतीक्षा कर रहे थे सोनिया गांधी ने वर्षो बाद एक इंटरव्यू मे कहा था कि “ पिताजी लगातार मन ही मन कुछ बुदबुदा रहे थे ओर हमारी तरफ देख अपनी आंखो से ही खोफ पैदा कर रहे थे लेकिन मेहमान राजीव के सामने बस वे कुछ बोल ही नहीं पाये एक सेनिक पिता को इस तरह मीने भी पहली बार देखा था लेकिन पिताजी को राजीव कि मुलाक़ात का तरीका बहुत पसंद आया था “

उधर नई दिल्ली भारत मे राजीव कि पसंद को लेकर इंद्रा गांधी भी परेशान थी लेकिन उन्होने खुद अपने समाज से बाहर के नोजवान से शादी थी इसलिए राजीव को भी अपनी पसंद चुनने का अधिकार दिया था लेकिन इतना भी नहीं कि राजीव विदेश से ऐसी गोरी मेम ले आए जिसे हिन्दी बोलना तो दूर ढंग से अंग्रेजी भी न आती हो ओर आखिरकार 1967 मे तुरिन मे माइनो परिवार के नाम एक आधिकारिक निमंत्रण आता है ओर इसको स्वीकार करते हुए पहली बार सोनिया भारत आती है चंद हफ़्तों कि ये यात्रा सोनिया माइनो को बहुत दूर स्थित एक देश को जानने का मौका देती है और किसे पता कि अगर सोनिया को भारत पसंद नही आता तो वो अपना मन बदलकर तुरिन  के किसी भद्र व्यवसाई के साथ घर बसा लेती लेकिन ऐसा नहीं हुआ सोनिया भारत आई और इंद्रा का विरोध पहली ही मुलाक़ात मे खतम हो गया इसके बाद इंद्रा ने ताउम्र सोनिया माइनो को अपनी बेटी का मान देकर ही रखा सोनिया ने पहली बार इंद्रा गांधी कि साड़ी भी ऐसे पहनी थी जैसे वो इससे पहले अकसर साड़ी पहनने कि आदि हो साल भर मे सोनिया जटिल केशभूषा को त्याग लंबे सीधे बाल रखने लगी थी ओर अपने होने वाले पति राजीव गांधी से हिन्दी सीखने मे मशगुल थी॰
फिर एक दिन दूर देश इटली मे माइनो परिवार के घर एक डाकिये ने तार थमाया जिसमे लिखा था “ प्रिय माँ ओर पिताजी मैं इंडिया मे बहुत खुश हूँ ओर जल्द ही राजीव और मैं शादी करने वाले है शादी का मुहूर्त 25 फरवरी 1968 को रखा गया है ओर आप दोनों को छोटी बहनो के साथ आना है” इस विवाह को लेकर सोनिया माइनो के पिता खुश थे या नाराज इसका जिक्र तो आज तक सोनिया ने नहीं किया लेकिन स्टेफ़िनों ओर पाउला दोनों शादी मे नही आए जबकि सोनिया के अंकल मारियो जरूर इटली से एकमात्र मेहमान इस शादी मे उपस्थित थे और चूंकि विवाह हिन्दू रीति से हुआ तो मारियो ने ही सोनिया के कन्यादान की रस्म निभाई भारतीय रीति रिवाजो से हुई इस शादी मे केथलिक पादरी की परछाई तक नही थी जिसे इटली मे तो अपरिहार्य माना जाता है
ओर इसी 25 फरवरी 1968 के साथ सोनिया का रूपान्तरण शुरू हो गया वो अपनी इतालवी भाषा लगभग न के बराबर बोलती थी अधिकतर अंग्रेजी या टूटी फूटी हिन्दी जिसे अभी सीखा ही जा रहा था प्रयोग मे लेती थी सोनिया ने अब उन सब प्रार्थनाओ को त्याग दिया था जो उसने ईश्वर, ईसा, ओर वर्जिन मेरी को पुकारने के लिए केथलिक स्कूल मे सीखी थी यहाँ तक की सोनिया अपने इटालियन खान पान तक को त्याग देती है
कुछ सालो बाद इंद्रा गांधी ने सोनिया की माँ पाओला को एक चिट्ठी लिखती है जिसमे कहती है की “ अपनी लाजवाब बेटी मुझे देने के लिए धन्यवाद मे आपका शुक्रिया अदा कैसे करू बता नही सकती”
इंद्रा ने जिन चिट्ठियों मे सोनिया को फूल जैसी सुंदर की उपमा दी थी सोनिया की माँ पाओला ने जीते जी उन चिट्ठियों को संभाल कर रखा      

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