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world after corona

   the world after corona (COVID-19)

world after corona


  कोरोना के बाद कैसी होगी दुनिया 



आज से ठीक 6 महीने पहले जब पूरी दुनिया 2020 के स्वागत मे तैयार खड़ी थी तब किसी ने सोचा न होगा की एक ऐसी अंजान महामारी विश्व भर मे ऐसी तबाही मचा देंगी की लोगो को अपनी ज़िंदगी बचाने के लिए महीनो महीनो भर घरो मे कैद होना पड़ेगा लोगो को अपने आस पास की किसी वस्तु मात्र को भी छूना भयंकर गलती की श्रेणी मे माना जाएगा ओर किसी एक की चूक ना सिर्फ उसके परिवार अपितु पूरे इलाके पूरे शहर को तबाह कर के छोड़ेगा

कोविड-19


हमेशा अलग अलग तरह के विध्व्स प्रयोग करने के लिए चीन अक्सर सुर्ख़ियो मे रहा है लेकिन इस बार चीन की इसी करतूत का खामियाजा पूरा विश्व भुगत रहा है दरअसल कुछेक देश इसे चीन की साजिश समझ रहे है तो कुछेक लेब मे घटित हुई एक भूल मात्र !

अब हकीकत क्या है ये तो चीनी ही बेहतर जानते है लेकिन आज कोविड के कारण चीन जिस तरह से विश्व पटल के निशाने पर है इससे एक बात तय हो जाती है की ये सब आनन फानन मे हुई चूक नहीं है बल्कि हो सकता है इसकी तैयारी काफी पहले से चल रही हो लेकिन आज साश्वत सत्य ये है की चीन ने पूरे विश्व को एक ऐसी महामारी दे दी है जिसका इलाज अभी तक तो नही निकला है ओर शायद अगले 2 साल और लग जाएगे!  कोरोना वायरस ने ऐसा कोई देश न छोड़ा जो दावा करता हो की उनके वहाँ ये बीमारी नही आई है ये बीमारी सिर्फ इंसान ही नही बल्कि किसी वस्तु मात्र को छूने पर भी लग जाती है ऐसे मे इंसान अपने आप को कितना सेफ रखे? कितना जागरूक बने? अंतत जरूरी वस्तु के लिए तो इंसान को बाहर जाना ही पड़ता है और जापान जैसा हर देश इतना विकसित भी नही की हर परिवार अपने काम हेतु पर्सनल रोबोट रख सके ताकि उसे किसी वस्तु को छुना न पड़े डरावनी बात तो ये है की विश्व की नंबर 1 चिकित्सा सुविधा वाला देश अमेरिका अब तक अपने 78000 लोगो की जान गंवा चुका है जबकि 1 लाख 32 हजार से ज्यादा एक्टिव संक्रमित है जबकि चिकित्सा क्षेत्र मे दूसरे नंबर का देश इटली 30 हजार से ज्यादा लोगो को कोरोना महामारी के कारण गंवा चुका ऐसी महामारी सदियो मे एकाध बार आती है ओर दुर्भाग्य से ये इस साल यानि 2020 मे आई है जिसके कारण पूरे विश्व जगत मे त्राहि त्राहि मची है ओर लोग अपने जीने का ढंग तक मजबूरन बदल रहे है

World after corona


मेरे मित्र दिनेश जी जिनकी दैनिक दिनचर्या मे लगभग 20 किमी का सफर 10 से 5 ऑफिस का झंझट शाम को 6 से 7 जिम वर्क आउट का समय रात को 9 से 10 डिन्नर बाद मे इवनिंग वॉक सब शामिल था कुल मिलाकर दिनेश जी एक अत्यंत व्यस्त नोकरी पेशा व्यक्ति थे जो आज पिछले 2 महीने से घर मे कैद है ओर उनका वजन 7 किलो बढ़ चुका है शरीर पर चर्बी चढ़ गयी है घर से बाहर झांकना उनके लिए एवरेस्ट फतह करने के बराबर है ऊपर से बाहर से आने वाला दूधवाला सब्जीवाला दिनेश का ब्लड प्रेशर और बढ़ा जाता है दिनेश जी इतने परेशान है की उन्हे समझ नहीं आता करे तो आखिर क्या करे क्योकि खाली दिमाग शैतान का घर
इस दुनिया मे दिनेश जी अकेले ऐसे व्यक्ति नही है जबकि इसकी संख्या करोड़ो मे है अब दिनेश जी की कोशिश है की घर बैठे ऑफिस से दिये गए लेपटोप का सही इस्तेमाल किया जाये एवं घर बैठ कर ही कोई ऐसा कार्य किया जाये जिसके मार्फत कुछ आमदनी जोड़ सके
जो पढे लिखे है और साधन संपन है वे सब आजकल वर्क फ्रम होम की साइट खोजते फिर रहे है और वक्त भी यही इशारा कर रहा है की आने वाले दौर मे विश्व मे अब 50% से ज्यादा लोग घर बैठे ऑनलाइन कार्य द्वारा अपनी आजीविका चलाएँगे जबकि अभी तक इनका आंकड़ा मात्र 10 से 15% तक ही था

दिनेश जी जैसे पेशेवर तो अपनी आजीविका चला लेंगे लेकिन  उनका क्या जो मजदूरी कर के आज तक अपना और पूरे परिवार का पेट भर रहे थे????
ये महामारी सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब और निम्न तबके के लोगो के लिए लेकर आई है जो फेक्टरियों मे मजदूर थे जो दिहाड़ी मजदूर थे जो दिनभर मे कुछ समान बेच अपनी आजीविका चलाते थे क्योकि अभी तो हालात बद्दतर है ही हो सकता है उनके लिए आने वाला दौर इससे भी खतरनाक हो क्योकि दुनिया पटरी पर आते वक़्त लगेगा और आ भी जाएगी तो शायद पहले जैसी नही रहेगी ये दुनिया क्योकि जो धरातल पर कार्य हो रहे थे उनमे कमी आना लाजिमी है और ऑनलाइन कार्यो मे बढ़ोतरी की असीम संभावना है ऐसे मे निम्न तबके का बुरा दौर तो आना अभी बाकी है
हमारे देश भारत मे भी अब बहुत कुछ बदल जाएगा हो सकता है मास्क को हमेशा के लिए सार्वजनिक जगहो पर पूर्णतया अनिवार्य कर दिया जाये हो सकता है बड़ी बड़ी फेक्टरियों मे मजदूरो की एक सीमा तक ही संख्या रखी जाये हो सकता है जो प्रोडक्ष्न अब तक होता आया था उसमे बड़े स्तर की कमी आ जाए ऐसी स्थिति मे सबसे ज्यादा दिक्कत निम्न तबके को आने वाली है और दुनिया मे चरमराती अर्थव्यवस्था के आगे सभी देशो के लिए अपने गरीब तबके को संभालना और उनके जीवन को फिर से पटरी पर लाना किसी चुनोती से कम न होगा       

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जिस तरह आज कल क्रिकेट जगत मे फिक्सिंग का साया अक्सर मंडराया रहता है उससे हर किसी के मन मे एक ही ख्याल आता है की क्या वास्तव मे मैच फिक्स होते होंगे ???? क्या आज भी क्रिकेटर अपने देश को धोखे मे रखे हुए है ??
आइये आज हम आपको एक दिलचस्प किस्सा सुनाते है जो आज से करीब 53 साल पहले घटित हुआ था जी हा 
हुआ कुछ ऐसा था की वो क्रिकेट जगत का पहला फिक्स मैच होने जा रहा था जिसमे बल्लेबाज मैच से पहले पैसे लेकर 0 पर आउट होने वाला था लेकिन अचानक ऐसा क्या हो गया जो सब कुछ तय होने के बाद भी मैच फिक्स ही नही हो पाया ???
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